टिहरी झील को बनाया जाएगा ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन, मुख्य सचिव ने दिए व्यापक विकास के निर्देश

देहरादून। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में टिहरी झील को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने को लेकर उच्च स्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि टिहरी लेक परियोजना को आकर्षक और आसानी से याद रहने वाला नाम दिया जाए तथा एमडी टीएचडीसी और जिलाधिकारी टिहरी को समिति की बैठकों में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी झील परियोजना को अधिकतम नवीकरणीय ऊर्जा आधारित पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित किया जाए। इसके तहत बनने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को सौर ऊर्जा से संचालित करने की संभावनाओं पर भी कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने झील के आसपास चयनित गांवों को उत्तराखंड की लोककला, संस्कृति, हस्तशिल्प और विरासत से जोड़ते हुए ट्रेडिशनल मॉडल विलेज के रूप में विकसित करने तथा स्थानीय लोगों की आजीविका से जोड़ने पर जोर दिया।
बैठक में परियोजना के अंतर्गत बनने वाली सभी परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव की दीर्घकालिक व्यवस्था सुनिश्चित करने, आय सृजन गतिविधियों को शामिल करने तथा वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर झील में बोटिंग और जेटी संचालन की क्षमता का आकलन कर चरणबद्ध लेकिन समग्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। मुख्य सचिव ने प्रस्तावित संग्रहालय में पुरानी टिहरी के राजशाही इतिहास, लोकसंस्कृति, लोककला और पुरानी टिहरी शहर के 3डी मॉडल को भी शामिल करने का सुझाव दिया।
बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. वी. षणमुगम, धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

