दून विश्वविद्यालय में ज्योतिबा फुले और डॉ. अंबेडकर की विरासत को समर्पित सप्ताह का शुभारंभ
देहरादून।दून विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में 11 अप्रैल 2025 को महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती और डॉ. भीमराव अंबेडकर को समर्पित सप्ताह का शुभारंभ हुआ। यह आयोजन सामाजिक सुधार और सशक्तिकरण के संकल्प के साथ इन दो महान विचारकों की विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अंबेडकर द्वारा लिखित पुस्तकों और उनके जीवन पर आधारित महत्वपूर्ण ग्रंथों की प्रदर्शनी से हुई। उद्घाटन करते हुए पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार ने डॉ. अंबेडकर के लेखन को आज भी जीवंत और प्रेरणादायक बताया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने डॉ. अंबेडकर के महिला अधिकारों पर विचारों की चर्चा करते हुए उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड के निर्माण में उनके दृष्टिकोण की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर की सोच आज की विधायी प्रक्रिया में भी मार्गदर्शक है।
प्रो. पुरोहित ने शशि थरूर की पुस्तक “Ambedkar: A Life” का संदर्भ देते हुए छात्रों को उनके विचारों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं, अंबेडकर विचारों के विद्वान प्रो. डोभाल ने सामाजिक न्याय पर उनके मौलिक लेखनों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय के प्रो. अमित वत्स ने अंबेडकर के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर संवाद की आवश्यकता बताई। पुस्तकालय की टीम—डॉ. उदिता नेगी, डॉ. रजनीश कुमार और डॉ. रमा बोहरा—ने विस्तृत पुस्तक प्रदर्शनी की व्यवस्था की, जिससे छात्र और प्राध्यापक इन महान विचारकों की समृद्ध विरासत से परिचित हो सकें।
पूरे सप्ताह चलने वाले इस आयोजन में विचार गोष्ठियों, चर्चाओं और विश्लेषण सत्रों के माध्यम से सामाजिक न्याय और समानता पर डॉ. अंबेडकर के योगदान को समझने और युवाओं में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
यह आयोजन इस बात का सशक्त संदेश है कि फुले और अंबेडकर की विचारधारा आज भी सामाजिक परिवर्तन और न्याय की दिशा में एक प्रेरक शक्ति बनी हुई है।

