राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने किया रिस्पाॅन्स पारिस्थितिक उत्तरदायित्व ’विषय पर वेबिनार का प्रसारण
ललित जोशी ,नैनीताल*
नैनीताल – उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा रिस्पाॅन्स पारिस्थितिक उत्तरदायित्व ’विषय पर एक वेबिनार का प्रसारण, वेबकास्ट किया गया। उक्त वेबिनार की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रवि मलीमठ, मुख्य न्यायाधीश, उत्तराखंड एवं कार्यकारी अध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा की गई थी।
उक्त वेबिनार में न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया, न्यायाधीश, उत्तराखंड के उच्च न्यायाल न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह, न्यायाधीश, उच्च न्यायालय उत्तराखंड के विशेषज्ञ डॉ. अनिल पी.जोशी, के साथ उपस्थित थे। हिमालयन पर्यावरण अध्ययन और संरक्षण संगठन के संस्थापक, डॉ. दुर्गेश पंत, प्रोफेसर और निदेशक, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय और डॉ. अंजन रे. निदेशक सीएसआईआर, आईआईपी।
मुख्य न्यायाधीश, उत्तराखंड के उच्च न्यायालय ने सूचित किया कि मानव समाज के सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण की सुरक्षा और स्थिरता के लिए समाज में कई हितधारकों की ओर से पारिस्थितिक उत्तरदायित्व सामूहिक और समन्वयवादी प्रयास है। उनके आधिपत्य ने यह भी बताया कि पारिस्थितिकी प्राकृतिक पर्यावरण और जैव विविधता के साथ सीधे जुड़ा हुआ है।
उनके आधिपत्य ने पर्यावरण संरक्षण के बारे में महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला और यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा एक पूर्ण विषय है और यह व्यक्ति तक ही सीमित नहीं है। सरकारें, गैर-सरकारी संगठन, कॉर्पोरेट क्षेत्र और प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए बाध्य हैं। उनके आधिपत्य ने सुझाव दिया कि जंगल की आग को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। घने जंगल समय की जरूरत है। पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर आम जन को जागरूक किया जाना चाहिए। औद्योगिक इकाइयों और कॉर्पोरेट क्षेत्रों की पारिस्थितिक जिम्मेदारियों को तय किया जाना चाहिए और पर्यावरण प्रदूषण के मामले में न्यायालयों को अनुकरणीय सजा के साथ आना चाहिए।

