मुख्यमंत्री धामी ने 17वें कृषि विज्ञान सम्मेलन का किया उद्घाटन

मुख्यमंत्री धामी ने 17वें कृषि विज्ञान सम्मेलन का किया उद्घाटन
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देहरादून।मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित 17वें कृषि विज्ञान सम्मेलन” में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रदेश के किसानों और कृषि के आधुनिकीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र को समृद्ध बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें उन्नत तकनीकों से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार तीन लाख रुपये तक का बिना ब्याज का ऋण, फार्म मशीनरी बैंक योजना, और एप्पल मिशन के तहत 80% सब्सिडी जैसी योजनाएं चला रही है। इसके अलावा, धौला देवी, मुनस्यारी एवं बेतालघाट को जैविक चाय बागान के रूप में विकसित करने का कार्य जारी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश में सगंध खेती को बढ़ावा देने के लिए छह एरोमा वैली विकसित करने की योजना पर कार्य कर रही है। इसके साथ ही, इस बार के बजट में किसानों एवं पशुपालकों के उत्थान के लिए 463 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय 1960 से लगातार कृषि एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध कर रहा है और देश के लिए वैज्ञानिकों व इंजीनियरों की नई पीढ़ी तैयार कर रहा है।

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों से आग्रह किया कि वे इस सम्मेलन में लगे विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन करें और पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि में नवाचार, डिजिटल कृषि, जलवायु परिवर्तन, स्मार्ट पशुधन पालन जैसे विषयों पर होने वाली चर्चाओं में भाग लें।

गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम.एस. चौहान ने बताया कि इस सम्मेलन में 16 देशों के वैज्ञानिक और 500 से अधिक प्रगतिशील किसान भाग ले रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के सहयोग से इस कृषि सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर मेयर विकास शर्मा, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, आईजी डॉ. योगेन्द्र सिंह रावत, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, एसएसपी मणिकान्त मिश्रा, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के वैज्ञानिक और कृषक उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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