रेशम उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय, उत्तराखण्ड बनेगा आत्मनिर्भर: कृषि मंत्री गणेश जोशी

रेशम उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय, उत्तराखण्ड बनेगा आत्मनिर्भर: कृषि मंत्री गणेश जोशी
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देहरादून, 21 फरवरी। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने सहसपुर में क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केन्द्र, केन्द्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार, सहसपुर-देहरादून के तत्वावधान में आयोजित रेशम कृषि मेले का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर उन्होंने रेशम विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा रेशम क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र द्वारा प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया, रेशम संग्रहालय तथा कृषि आधारित शहतूत वृक्षारोपण के एकीकृत मॉडल का उद्घाटन किया। उन्होंने परिसर में पौधारोपण भी किया और रेशम कृषकों से संवाद कर उनके अनुभव सुने।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड बहुमूल्य बाईवोल्टीन रेशम कोया उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है और इसकी गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। उन्होंने बताया कि राज्य के मैदानी और तराई क्षेत्र बाईवोल्टीन प्रजाति के कोया उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। वहीं पर्वतीय एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों में, जहां भारी उद्योग स्थापित करना संभव नहीं है, वहां उपलब्ध श्रमशक्ति का उपयोग करते हुए किसानों को ओक टसर, मूगा और एरी जैसे वन्या रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में राज्य कैबिनेट द्वारा रेशम कोयों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पारित किया गया है, जिससे किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिलेगा। साथ ही विभागीय औद्यानिक कार्यों में लगे दैनिक श्रमिकों की मजदूरी ₹195 प्रतिदिन से बढ़ाकर ₹480 प्रतिदिन की गई है। उन्होंने घोषणा की कि शीघ्र ही गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में एक-एक सिल्क पार्क विकसित किए जाएंगे।

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तथा केन्द्रीय रेशम बोर्ड के माध्यम से संचालित केंद्रपोषित योजनाओं के तहत रेशम कीटपालकों को वृक्षारोपण, कीटपालन भवन निर्माण और उपकरणों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों की दक्षता बढ़ाई जा रही है, जिससे कोया और वस्त्र उत्पादन में वृद्धि हो और किसानों की आय सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने बताया कि “रेशम ककून क्राफ्ट” जैसी नवाचारी योजना के तहत महिला रेशम कृषक रेशम कोयों से आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। इससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्य से जुड़ी 12 से अधिक महिलाएं प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
मंत्री जोशी ने कहा कि पहले राज्य रेशम कीट बीज आपूर्ति के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर था, लेकिन अब राज्य में ही उच्च गुणवत्ता वाले रेशम कीट बीजों का उत्पादन किया जा रहा है। इससे उत्तराखण्ड आत्मनिर्भर बना है और भविष्य में अन्य राज्यों को भी रेशम कीट बीज उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि रेशम उद्योग के सर्वांगीण विकास के लिए किसानों, विभाग और सरकार की संयुक्त जिम्मेदारी है, जिसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाया जाएगा ताकि राज्य में रेशम उद्योग नई ऊंचाइयों तक पहुंचे।
इस अवसर पर स्थानीय विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, निदेशक रेशम प्रदीप कुमार, पूर्व निदेशक डॉ. सरदार सिंह, प्रभारी छेत्रपाल सिंह, डॉ. हर्ष कुमार, डॉ. गुलज़ार अहमद खान सहित बड़ी संख्या में रेशम कृषक उपस्थित रहे।

देवभूमि खबर

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