विनिर्माण क्षेत्र की गति के लिए तकनीकी नवाचार आवश्यक: प्रो सुरेखा डंगवाल

विनिर्माण क्षेत्र की गति के लिए तकनीकी नवाचार आवश्यक: प्रो सुरेखा डंगवाल
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देहरादून।दून विश्वविद्यालय में प्रतिष्ठित अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) – PAIR परियोजना के अंतर्गत “इंडस्ट्री 4.0 के लिए एआई, मटेरियल साइंस एवं साइबर सुरक्षा के अभिसरण” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में देशभर के प्रख्यात शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया तथा आधुनिक विनिर्माण और औद्योगिक नवाचार को आकार देने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों पर विचार-विमर्श किया।

यह कार्यशाला भारत के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थान तथा राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) में प्रथम स्थान प्राप्त आईआईटी मद्रास के नेतृत्व में संचालित ANRF-PAIR पहल के अंतर्गत आयोजित की गई। इस पहल का उद्देश्य अग्रणी संस्थानों और उभरते विश्वविद्यालयों के मध्य सहयोग स्थापित कर अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ बनाना तथा बहुविषयक नवाचार को बढ़ावा देना है।

दून विश्वविद्यालय इस राष्ट्रीय पहल का एक महत्वपूर्ण सहभागी संस्थान है तथा विशेष रूप से यह उत्तरी भारत का एकमात्र स्पोक संस्थान है जो इस प्रतिष्ठित समूह का हिस्सा है।
कार्यशाला में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), मशीन लर्निंग, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन, इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IIoT), साइबर-फिजिकल सिस्टम्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, उन्नत पदार्थ विज्ञान (Advanced Materials), साइबर सुरक्षा, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, डिजिटल ट्विन्स तथा इंडस्ट्रियल सिमुलेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन प्रौद्योगिकियों का समन्वय उद्योग 4.0 को गति प्रदान कर रहा है तथा बुद्धिमान स्वचालन, डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली, उच्च उत्पादकता और सुरक्षित औद्योगिक ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कार्यशाला में अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने सहभागिता की। प्रमुख विशेषज्ञों में प्रो. जॉन ऑगस्टीन, कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग, आईआईटी मद्रास; प्रो. जी. एल. सैमुअल, यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग, आईआईटी मद्रास; तथा डॉ. चर्चित कुमार, यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग, आईआईटी मद्रास शामिल रहे। कार्यक्रम में डॉ. मयंक स्वर्णकार, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी; डॉ. रमेश बाबू बत्तुला, एसोसिएट प्रोफेसर, मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT), जयपुर; श्री भूपेश जनोटी, हेड–इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एंड स्ट्रैटेजिक ट्रांसफॉर्मेशन, डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI), तथा प्रो. आनंद फड़निस, सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विशेषज्ञ व्याख्यान भी प्रस्तुत किए गए। सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने डिजिटल परिवर्तन और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग प्रौद्योगिकियों पर महत्वपूर्ण औद्योगिक दृष्टिकोण साझा किए। कार्यक्रम में एनआईटी मिजोरम, एनआईटी पुडुचेरी, आईआईआईटी तिरुचिरापल्ली, भारथियार विश्वविद्यालय, कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी तथा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ तमिलनाडु के प्राध्यापकों एवं शोधकर्ताओं ने स्पोक संस्थानों के रूप में भागीदारी की।

ANRF-PAIR सहयोग की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दून विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को प्राप्त हो रहे अवसर हैं। इस पहल के अंतर्गत विश्वविद्यालय के विद्यार्थी आईआईटी मद्रास में इंटर्नशिप और शोध प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जहाँ उन्हें अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, उन्नत अनुसंधान सुविधाओं तथा विशेषज्ञ मार्गदर्शन का लाभ मिल रहा है। यह अनुभव उनकी अनुसंधान क्षमता और नवाचार कौशल को नई दिशा प्रदान कर रहा है।

कार्यशाला का आयोजन डॉ. चारु द्विवेदी, प्रधान अन्वेषक , ANRF-PAIR परियोजना, दून विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किया गया। आयोजन समिति में डॉ. हिमानी शर्मा, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. प्रीति मिश्रा, डॉ. अनुज धीमान, तथा डॉ. सरिता सिंह ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कार्यक्रम के सफल संचालन में योगदान दिया।

इस अवसर पर दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने ANRF-PAIR पहल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा, “विनिर्माण का भविष्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत पदार्थ विज्ञान और साइबर सुरक्षा के संगम में निहित है। इन क्षेत्रों का अभिसरण स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री 4.0 की आधारशिला तैयार करता है, जो उद्योगों के कार्य करने, नवाचार करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के तरीकों को पुनर्परिभाषित कर रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि ANRF-PAIR कार्यक्रम विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को उन्नत अनुसंधान सुविधाओं, विशेषज्ञ मार्गदर्शन तथा सहयोगात्मक नवाचार के अवसर उपलब्ध करा रहा है, जिससे देश में अनुसंधान और नवाचार की संस्कृति को नई मजबूती मिल रही है।

कार्यशाला का सफल आयोजन आईआईटी मद्रास और दून विश्वविद्यालय के मध्य बढ़ते अनुसंधान सहयोग का प्रतीक रहा। इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि बहुविषयक अनुसंधान और संस्थागत सहयोग भविष्य की तकनीकी एवं औद्योगिक चुनौतियों का समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम का समापन भविष्य में और अधिक शैक्षणिक सहयोग, छात्र सहभागिता तथा नवाचार-आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के संकल्प के साथ हुआ।

देवभूमि खबर

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