काम किया होता तो अमिताभ की जरूरत क्यों पड़ती: भावना पांडे
देहरादून। राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने प्रदेश कैबिनेट द्वारा फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन को टूरिज्म के प्रमोशन के लिए 12.5 करोड़ रुपये देने के फैसले की निंदा की हैै। उन्होंने कहा कि अमिताभ बच्चन को यह धनराशि देना सही नहीं होगा। उनके अनुसार यदि प्रदेश सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कार्य किया होता तो ये अमिताभ बच्चन को यह धनराशि देने की जरूरत ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यटन को लेकर हवाई नीतियां बनाई हैं और उन पर अमल नहीं किया। प्रदेश के अधिकांश पर्यटन स्थलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
राज्य आंदोलनकारी और समाजसेवी भावना पांडे ने कहा कि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने हाल में मसूरी में रोपवे का उद्घाटन किया। लेकिन वहां सैलानी खाएंगे, क्या? मैॅगी। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि देहरादून से मसूरी तक केवल मैगी और चाय ही मिलती है। पर्यटक यहां आकर ठगा सा महसूस करता है। उनके अनुसार सरकार ने पिछले चार साल रोजगार, पर्यटन, खेती, महिला उत्थान आदि क्षेत्रों में कोई भी काम नहीं किया। अब जबकि विधानसभा चुनाव नजदीक हैं तो वो मोदी जी की नकल कर रहे हैं और अमिताभ बच्चन के नाम का सहारा ले रहे हैं।
भावना पांडे के अनुसार उत्तराखंड मिनी स्वीट्जरलैंड है। यहां टूरिस्ट भी आना चाहते हैं लेकिन सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने हाथीपांव और क्लाउड एंड, जार्ज एवरेस्ट, भद्राश मंदिर का उदाहरण दिया कि यहां टूरिस्ट को भूखा रहना पड़ता है। क्लाउंड एंड इतनी खूबसूरत जगह है लेकिन वहां केवल टूटी हुई झोपड़ी है। वो तर्कपूर्ण ढंग से सवाल करती हैं कि क्या बेहतर नहीं होता कि क्लाउड एंड पर सरकार एक रेस्तरां बना देती। यदि प्राइवेट रेस्तरां या होटल नहीं बन सकता तो जीएमवीएन तो यहां हर दस किलोमीटर पर एक रेस्तरां चला सकता था। राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने कहा कि सरकार की नीयत में खोट है।
उन्होंने कहा कि अमिताभ बच्चन को इतनी बड़ी धनराशि देने से अच्छा यह है कि शिक्षा मित्रों, भोजनमाताओं, आंगनबाड़ी कर्मियों, रोडवेज कर्मचारियों को वेतन दे दो। उन्होंन कहा कि सरकार बिना योजना के कार्य कर रही है। सरकार के लिए बुद्धि-शुद्धि यज्ञ किये जाने की जरूरत है। कोरोना काल में कई लोगों का रोजगार छिन गया, गरीबों के लिए दो वक्त की रोटी की समस्या है। सरकार को चाहिए था कि इनकी सुध लेती न कि अमिताभ बच्चन को भारी-भरकम राशि दी जाती।
उन्होंने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से कहा कि आप करोड़ों के प्रोजेक्ट का फीता काटकर लौट आते हो, लेकिन पलटकर वहां सुविधाओं का जायजा नहीं लेते। 300 करोड़ के प्रोजेक्ट से सैलानी नहीं आएंगे। उन्हें सुविधाएं चाहिए। भावना पांडे ने उन्हें चुनौती दी कि वो हाथी पांव या क्लाउड एंड जाएं तो वहां की सड़क कितनी खतरनाक है। भद्राश तक सड़क पर एक ही वाहन चल सकता है।
राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे का कहना है कि पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़कें हों। वहां होटल और पहाड़ी व्यंजनों की सुविधा होनी। यहां म्यूजियम हो, लोक-संस्कृति की छटा बिखरे। पहाड़ की विरासत और खान-पान और अन्य उत्पाद हों ताकि सैलानियों के लिए कुछ पहाड़ की कुछ यादगार वस्तुएं हों और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार भी मिल सके।

