आशा फैसिलेटटरों ने नौ सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन, सरकार को चेताया
देहरादून। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत आशा फैसिलेटटरों के शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, उत्तराखंड स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को अपनी नौ सूत्रीय मांगों के निराकरण के लिए ज्ञापन सौंपा।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर विभिन्न जिलों में रैलियां और ज्ञापन सौंपकर आशा एवं आशा फैसिलेटटरों ने शासन-प्रशासन को अपनी जायज मांगों पर ध्यान देने के लिए आगाह किया।
प्रदेश महामंत्री रेनू नेगी ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत आशा एवं आशा फैसिलेटटर बेहद कम मानदेय में निष्ठापूर्वक काम कर रही हैं। प्रदेश में 12,315 आशाएं कार्यरत हैं, जिनके लिए 2010 में योग्यता के अनुसार आशा फैसिलेटटरों की नियुक्ति की गई थी। एक आशा फैसिलेटटर के अधीन 30 से 40 आशाएं होती हैं, लेकिन अब तक न तो पूर्ववर्ती सरकारों ने और न ही वर्तमान सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान किया।
आशा फैसिलेटटरों की नौ प्रमुख मांगे
- 25 दिन की मोबिलिटी के बजाय 30 दिन की स्थायी ड्यूटी दी जाए।
- स्टेशनरी सामान और यात्रा भत्ता प्रदान किया जाए।
- आशा फैसिलेटटरों को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए।
- सेवानिवृत्त के बाद पेंशन एवं रिटायरमेंट लाभ दिए जाएं।
- प्लस पोलियो कार्यक्रम में 100 रुपये के बजाय 600 रुपये मानदेय दिया जाए।
- प्रदेशभर में सर्दी और गर्मी के लिए अलग-अलग वर्दी लागू की जाए।
- महिला सशक्तिकरण योजना के तहत आशा फैसिलेटटरों को लाभ दिया जाए।
- पीएलए (पार्टिसिपेटरी लर्निंग एंड एक्शन) बैठक का मानदेय 100 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये किया जाए।
ज्ञापन सौंपते समय प्रदेशाध्यक्ष रेनू नेगी, कार्यकारिणी अध्यक्ष कुसुम चौहान, कार्यकारिणी सदस्य पूनम भारतीय मजदूर संघ, पिंकी रावत, मिथीलेश, पूनम, संजू कंडारी, आनंदी गोदियाल, अवनीश कांत, उत्तरकाशी क्षेत्रीय पंचायत सदस्य गिरीश भट्ट सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

