
देहरादून।अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आयोजित “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मल्टीप्ल एंट्री- मल्टीप्ल एग्जिट, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और डिजिटल शिक्षा व्यवस्था” विषय पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पुरोला उत्तरकाशी द्वारा आयोजित वेबीनार को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा निदेशक प्रो वी एन खाली ने कहा कि यह शिक्षा नीति विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है क्योंकि इसमें विषयों के चयन की व्यवस्था के साथ-साथ मल्टीप्ल एंट्री और एग्जिट का विकल्प विकट परिस्थितियों में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित करेगा l
प्रो खाली ने कहा की शिक्षा के डिजिटलीकरण से भौगोलिक अवस्थित विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया में किसी प्रकार चुनौती नहीं रहेगी क्योंकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से दुनिया के किसी भी विद्वान का व्याख्यान सुनना उनके ज्ञान के परिमार्जन में सहायक होगा।उच्च शिक्षा निदेशक ने कहा कि उत्तराखंड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पूर्ण रूप से लागू है और हम लोग लगातार इसके सुचारू क्रियान्वयन के लिए विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ समय-समय पर संवाद करते रहते हैं।
कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहे कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीन प्रो अतुल जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के समस्त प्रावधान शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति सीखने की ललक उत्पन्न करने में सहायक होगा। प्रोफेसर जोशी ने कहा कि बदलते वैश्विक परिवेश के अनुरूप शिक्षकों को भी अपने कार्य व्यवहार में बदलाव करना होगा क्योंकि आज का समय नित रोज नए-नए बदलावों और नवाचार को प्रेरित कर रहा है इसलिए हमें तकनीकी ज्ञान को अर्जित करना होगा जिससे नवाचार और सृजन शक्ति का परिमार्जन होगा जिस शिक्षण रुचिकर होगा।
मल्टीप्ल एंट्री और एग्जिट के प्रावधान को विस्तार से समझाते हुए दून विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक एवं स्कूल आफ टेक्नोलॉजी के डीन डॉक्टर नरेंद्र रावल ने कहा कि इस व्यवस्था के तहत कोई विद्यार्थी यदि बीच में किसी वजह से पढ़ाई जारी नहीं रख सकता है तो वह अधिकतम 7 वर्ष के अंतराल में दोबारा अध्ययन के लिए प्रवेश पा सकता है l उन्होंने कहा कि एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट होना आवश्यक है जिसकी मॉनिटरिंग डिजिलॉकर से की जाएगी और यह विद्यार्थी के आधार से लिंक होगा ।
डॉ रावल ने एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, अपार आईडी का वर्णन करते हुए कहा कि यह दोनों आईडी एक ही है इसलिए किसी तरह से भटकाव की आवश्यकता नहीं है उन्होंने शिक्षा के डिजिटलीकरण पर भी विस्तार से चर्चा की।
धन्यवाद ज्ञापन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पुरोला उत्तरकाशी के प्राचार्य एवं वेबीनार के आयोजक प्रोफेसर अरविंद के तिवारी ने किया।अतिथियों का स्वागत एवं शांति पाठ का वाचन डॉ सुधांशु जोशी ने किया ।
कार्यक्रम का संचालन प्रो एच सी पुरोहित ने किया।
इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों महाविद्यालयों से जुड़े शिक्षाविदों ने प्रतिभाग किया मुख्य रूप से अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ अलका सूरी, प्रो सुषमा मिश्रा, प्रो एन डी कांडपाल, आशुतोष पुरोहित, डॉ डी एस नेगी, कृष्णकांत खाली, शिखा, डॉ मान्वेंद्र बर्तवाल, कुमुद् उपाध्याय, कविता टमता आदि उपस्थित रहे l

