राष्ट्रपति आशियाना को कंक्रीट से मुक्त रखने का आग्रह,देहरादून सिटीजन फोरम ने 60 से अधिक लोगों के हस्ताक्षर सहित राष्ट्रपति को भेजा पत्र
देहरादून। देहरादून के प्रबुद्ध नागरिकों के संगठन देहरादून सिटीजन फोरम (DCF) ने राष्ट्रपति आशियाना को आम लोगों के लिए खोलने के फैसले का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति को एक हस्ताक्षरयुक्त पत्र भेजा है। इस पत्र में आग्रह किया गया है कि आशियाना को हरित क्षेत्र के रूप में ही विकसित किया जाए और इसे सीमेंट-कंक्रीट से मुक्त रखा जाए।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 132 एकड़ में फैले इस ऐतिहासिक परिसर को पक्षी और तितली पार्क के रूप में विकसित किया जाए तथा यहां मौजूद पेड़ों को किसी भी स्थिति में क्षति न पहुंचाई जाए।
डीसीएफ ने राष्ट्रपति से देहरादून की पारिस्थितिकी और भूगर्भीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पार्क का विकास प्रकृति-केंद्रित तरीके से करने की अपील की है।
नागरिकों ने पत्र में लिखा है कि बीते वर्षों में देहरादून का प्राकृतिक संतुलन तेजी से बिगड़ा है। अंधाधुंध कंक्रीटीकरण और अव्यवस्थित निर्माणों के चलते भूजल स्तर घटा है और तापमान में वृद्धि हुई है। ऐसे में यह ज़रूरी है कि राष्ट्रपति आशियाना का विकास एक उदाहरण बने — एक ऐसा हरित स्थल जो प्राकृतिक सौंदर्य, पर्यावरणीय संरक्षण और नागरिक भागीदारी का प्रतीक हो।
संगठन ने मसूरी के जबरखेत एस्टेट का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया है कि राष्ट्रपति आशियाना को भी उसी तरह संरक्षित और प्राकृतिक रूप से संवर्धित किया जाए। साथ ही राष्ट्रपति भवन द्वारा आम जनता से प्रतिक्रिया और सुझाव मांगे जाने पर खुशी जाहिर करते हुए इस संवाद को लोकतांत्रिक और स्वागतयोग्य कदम बताया गया।
DCF ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रपति भवन उनकी इस अपील को गंभीरता से लेते हुए देहरादून को एक हरित विरासत देने की दिशा में सकारात्मक पहल करेगा।
इस पत्र पर अनीश लाल, अनूप नौटियाल, भारती जैन, लोकेश ओहरी, राधा चटर्जी, रितु चटर्जी, रविंद्र जुगरान, ब्रिज मोहन शर्मा, शूरवीर सिंह सजवाण, डॉ. वी.के. डोभाल, ओम प्रकाश सती और श्रीमती चित्रा देवी समेत 60 से अधिक प्रमुख नागरिकों के हस्ताक्षर हैं।

