सतत पर्यावरण हेतु नई तकनीकों पर दून यूनिवर्सिटी की दो-दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक सम्पन्न
देहरादून। दून विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड नेचुरल रिसोर्सेज द्वारा नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF) प्रायोजित एसएसआर कार्यशाला के दूसरे दिन विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों ने पर्यावरणीय सततता (Environmental Sustainability) से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला में अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्ण भागीदारी की।
दिन की शुरुआत विश्वविद्यालय द्वारा स्वागत एवं सत्र-परिचय से हुई। दूसरे दिन के सभी सत्रों का संचालन कार्यशाला संयोजक डॉ. अचलेश दावरे ने किया।
दूसरे सत्र में डॉ. चारू ने MOF तकनीक पर व्याख्यान देते हुए बताया कि तेल रिसाव (Oil Spill) से उत्पन्न जल प्रदूषण को सोखकर यह तकनीक जल गुणवत्ता और जलीय जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने में अत्यंत उपयोगी है।
तीसरे सत्र में दून विश्वविद्यालय की भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. हिमानी शर्मा ने हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर विस्तृत जानकारी दी और बताया कि यह तकनीक भविष्य में ऊर्जा का स्वच्छ और टिकाऊ विकल्प बन सकती है।
चौथे सत्र में IIT रूड़की के डॉ. गोपीनाथ ने जल संरक्षण से जुड़ी उन्नत तकनीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि नवीन वैज्ञानिक उपाय किस प्रकार जल संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।
इसके बाद डॉ. शुभम पाल ने हाइड्रोजन तकनीक के विभिन्न अनुप्रयोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तकनीक भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऊर्जा का सुरक्षित समाधान होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन को कम करने में भी सहायक सिद्ध होगी।
अंतिम सत्र में दून विश्वविद्यालय के डॉ. उज्जवल कुमार ने मशीन लर्निंग की पर्यावरणीय शोध में भूमिका पर चर्चा की और बताया कि यह तकनीक भविष्य में पर्यावरणीय समाधान विकसित करने में नई संभावनाओं को जन्म दे रही है।
दिनभर चले तकनीकी सत्रों के अलावा प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय की भौतिकी, रसायन विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान विभागों तथा सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फ़ैसिलिटी का भी भ्रमण किया। प्रतिभागियों को उन्नत उपकरणों, चल रहे शोध कार्यों और उभरती पर्यावरणीय तकनीकों के प्रत्यक्ष प्रदर्शन देखने का अवसर मिला, जिससे उन्हें वास्तविक शोध प्रक्रियाओं की गहन समझ प्राप्त हुई।
समापन सत्र की अध्यक्षता डीन स्टूडेंट वेलफेयर (DSW) डॉ. एच. सी. पुरीहित ने मुख्य अतिथि के रूप में की। दून विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री दुर्गेश डिमरी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने SENR द्वारा वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। समापन के बाद प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए और दो दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
समग्र रूप से, दूसरे दिन की कार्यशाला पर्यावरणीय चुनौतियों, नई तकनीकों और टिकाऊ समाधानों पर केंद्रित रही, जिसने प्रतिभागियों को अनुसंधान और नवाचार की दिशा में नई दृष्टि और महत्वपूर्ण ज्ञान प्रदान किया।

