PSIEC प्लॉट आवंटन घोटाले में ED की कार्रवाई, 4.01 करोड़ फ्रीज और 12.15 लाख की नकदी जब्त

चंडीगढ़। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के जालंधर जोनल कार्यालय ने औद्योगिक प्लॉटों के कथित अवैध आवंटन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 4, 5 और 6 अगस्त 2026 को चंडीगढ़, अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना स्थित 11 परिसरों में तलाशी अभियान चलाया। इसके साथ ही पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (PSIEC) के कार्यालय में सर्वे की कार्रवाई भी की गई। कार्रवाई PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत की गई।
तलाशी के दौरान कई परिसरों से आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद कर जब्त किए गए। ED ने यह कार्रवाई पंजाब पुलिस के विजिलेंस ब्यूरो थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत PSIEC के अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की है।
ED की जांच में सामने आया कि PSIEC के कुछ अधिकारियों ने तकनीकी उद्योगों की जानकारी नहीं रखने वाले लोगों के नाम पर औद्योगिक प्लॉट कथित रूप से अवैध तरीके से आवंटित किए। इन आवेदनों में फर्जी फर्मों और फर्जी पतों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि PSIEC अधिकारियों से करीबी संबंधों के चलते इन लोगों को प्लॉट आवंटित किए गए।
जांच में यह भी पता चला कि कई मामलों में आवंटित प्लॉटों का कब्जा निर्धारित समय पर नहीं दिया गया और वर्षों तक इसमें देरी की गई। इस बीच की अवधि को ‘जीरो पीरियड’ मानकर आवंटन की तारीखों को कई वर्ष आगे बढ़ाया गया, जिससे लाभार्थियों को बिना ब्याज भुगतान की सुविधा मिलती रही।
ED के अनुसार, इन कथित अवैध आवंटनों के बदले अधिकारियों को भारी रिश्वत मिली। रिश्वत की रकम सीधे नकद लेनदेन के साथ-साथ विभिन्न वित्तीय माध्यमों से लेयरिंग कर प्राप्त किए जाने के साक्ष्य सामने आए हैं। कई प्लॉट शेल संस्थाओं और फर्जी कंपनियों के नाम पर आवंटित किए गए, जिन्हें बाद में बाजार मूल्य पर तीसरे पक्ष को बेचकर भारी रकम अर्जित की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि उद्योग स्थापित करने के लिए आवंटित कुछ प्लॉटों को बाद में बांटकर आवासीय और व्यावसायिक प्लॉटिंग के लिए इस्तेमाल किया गया।
तलाशी के दौरान ED ने 12.15 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद कर जब्त की। इसके अलावा PSIEC के सेवानिवृत्त अधिकारियों सुरिंदर पाल सिंह, पूर्व चीफ जनरल मैनेजर और जसविंदर सिंह रंधावा, पूर्व जनरल मैनेजर के बैंक खातों में करीब 4.01 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज की गई है।
ED ने मामले में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। मामले की आगे की जांच जारी है।

