54 करोड़ से अधिक मूल्य का 37.064 किलो सोना ईडी ने किया अस्थायी रूप से कुर्क

गुवाहाटी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी जोनल कार्यालय-1 ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अक्षय परशुराम बनसोडे और अन्य अज्ञात व्यक्तियों से जुड़े मामले में 37.064 किलोग्राम सोना अस्थायी रूप से कुर्क किया है। कुर्क किए गए सोने की अनुमानित कीमत 54 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। इसमें 29 बड़े आकार की सोने की छड़ें और 50 छोटे आकार के सोने के टुकड़े शामिल हैं। इसके अलावा करीब 13 ग्राम वजन के चांदी रंग के धातु के टुकड़े भी बरामदगी में शामिल हैं।
ईडी के अनुसार यह सोना 30 जून 2026 को असम पुलिस ने गुवाहाटी के खारघुली हातिसिल क्षेत्र में अक्षय परशुराम बनसोडे के कब्जे से बरामद किया था। वर्तमान में जब्त सोना कामरूप मेट्रो कोषागार, गुवाहाटी की सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है।
ईडी ने कामरूप मेट्रो के लतासिल थाने में दर्ज मामले के आधार पर पीएमएलए के तहत जांच शुरू की थी। मामला संगठित तरीके से अवैध रूप से सोने के परिवहन, तस्करी किए गए सोने को छिपाने और आपराधिक साजिश से संबंधित है।
जांच में सामने आया कि अक्षय परशुराम बनसोडे कथित तौर पर कई वर्षों से एक अज्ञात व्यक्ति के निर्देश पर देश के विभिन्न हिस्सों में सोने का परिवहन करता था। ईडी के अनुसार यह अज्ञात व्यक्ति कूरियरों के एक सिंडिकेट को नियंत्रित करता था और पहचान के लिए एक कूट प्रणाली का इस्तेमाल करता था। इसके बदले बनसोडे को निश्चित मासिक पारिश्रमिक दिया जाता था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जब्त सोना कथित तौर पर म्यांमार और संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते भारत में तस्करी के माध्यम से लाया गया था। इसके भुगतान के लिए हवाला माध्यम का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। इसके बाद सोने को कुछ कारोबारियों द्वारा तैयार किए गए चालानों के माध्यम से औपचारिक सर्राफा कारोबार में शामिल करने का प्रयास किए जाने की बात जांच में सामने आई है। ये कारोबारी एक बुलियन रिफाइनिंग कंपनी से जुड़े बताए गए हैं।
ईडी की जांच में जब्त सोने पर स्वामित्व का दावा करने के लिए बिक्री दस्तावेज के रूप में पेश किए गए कुछ चालानों की भी जांच की गई। ईडी के अनुसार संबंधित न्यायालय ने इन दस्तावेजों को प्रथम दृष्टया जाली पाया और सोना रिलीज करने के दावेदार के आवेदन को खारिज कर दिया।
जांच में यह भी पाया गया कि जिस व्यक्ति के कब्जे से सोना बरामद हुआ था और जिस व्यक्ति ने उस पर स्वामित्व का दावा किया था, दोनों ही सोने के वैध अधिग्रहण से संबंधित कोई सीमा शुल्क निकासी प्रमाणपत्र, आयात दस्तावेज या अन्य वैध प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।
