वन्यजीव तस्करी पर STF की बड़ी कार्रवाई, दो तस्कर गिरफ्तार
देहरादून।उत्तराखंड एसटीएफ की एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स ने डब्ल्यूसीसीबी दिल्ली की सूचना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए देहरादून जनपद के कालसी थाना क्षेत्र से दो वन्य जीव तस्करों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 02 भालू पित्त (वजन क्रमशः 19 ग्राम व 08 ग्राम) और 12 बोर के 03 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
देश में वन्य जीव अंगों की अवैध तस्करी पर रोकथाम के लिए पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड, श्री दीपम सेठ द्वारा एसटीएफ को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। इस निर्देश के तहत एसएसपी एसटीएफ श्री नवनीत भुल्लर ने टीमों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वन्य जीव तस्करी में संलिप्त प्रत्येक तस्कर की कुंडली तैयार कर उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। इसी क्रम में उत्तराखंड एसटीएफ को डब्ल्यूसीसीबी दिल्ली से सूचना मिली कि चकराता, कालसी, देहरादून क्षेत्र में वन्य जीव अंगों की अवैध तस्करी हो रही है। एसटीएफ ने इस सूचना को अपने स्तर पर सत्यापित कर 25 फरवरी 2025 को कालसी क्षेत्र में जोहड़ी, कालसी-चकराता मार्ग पर घेराबंदी कर दो तस्करों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कलम सिंह चौहान (32 वर्ष) और संतु (44 वर्ष) के रूप में हुई है, जो दोनों ग्राम बनियाना, पोस्ट मिंडल, तहसील चकराता, जिला देहरादून के निवासी हैं। फिलहाल संतु नया कालसी, देहरादून में रह रहा था। आरोपियों के कब्जे से बरामद किए गए भालू पित्त को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की पहली अनुसूची में रखा गया है, जिसका शिकार करना गंभीर अपराध है। इस मामले में थाना कालसी देहरादून में वन्यजीव अधिनियम और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसएसपी एसटीएफ श्री नवनीत भुल्लर ने बताया कि अभियुक्तों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और इस मामले में आगे भी गहन जांच की जा रही है। यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में वन विभाग से भी समन्वय स्थापित कर जांच की जा रही है।
एसएसपी एसटीएफ ने जनता से अपील की है कि यदि उन्हें वन्यजीव तस्करी से संबंधित कोई भी जानकारी मिले, तो वे तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन या उत्तराखंड एसटीएफ (📞 0135-2656202) से संपर्क करें। उत्तराखंड एसटीएफ आगे भी वन्य जीव तस्करों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगी ताकि बेजुबान जानवरों के शिकार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

