दून विश्वविद्यालय में खुलेगा ‘हिन्दू अध्ययन केन्द्र’ वेद-पुराण अध्ययन का बनेगा राष्ट्रीय केन्द्र: डॉ. धन सिंह रावत
देहरादून। भारतीय ज्ञान परंपरा को समर्पित एक ऐतिहासिक पहल के तहत दून विश्वविद्यालय में शीघ्र ही ‘हिन्दू अध्ययन केन्द्र’ की स्थापना की जाएगी। यह केन्द्र भारतीय आध्यात्मिक, दार्शनिक, ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अध्ययन, विश्लेषण और संरक्षण का एक बहुविषयक मंच होगा। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सचिवालय स्थित डीएमएमसी सभागार में विश्वविद्यालय की समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी दी।
डॉ. रावत ने बताया कि दून विश्वविद्यालय बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के बाद देश का दूसरा विश्वविद्यालय होगा, जहां वेद, पुराण, रामायण, महाभारत, तत्त्व विमर्श, धर्म-कर्म विमर्श और भारतीय दर्शन जैसे विषयों का विधिवत अध्ययन कराया जाएगा। उन्होंने विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल को निर्देशित किया कि ‘हिन्दू अध्ययन केन्द्र’ की स्थापना के सभी औपचारिक कार्य शीघ्र पूरे किए जाएं।
उन्होंने कहा कि यह केन्द्र आधुनिकता और परंपरा के बीच सेतु का कार्य करेगा और विद्यार्थियों को नैतिकता, सांस्कृतिक चेतना व विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से समृद्ध बनाकर जागरूक नागरिक और नेतृत्व प्रदान करने में सहायक होगा। यहां चार वर्षीय स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिनमें भारतीय चिंतन, वाद-परंपरा, नेतृत्व और संगठनात्मक व्यवहार जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे।
डॉ. रावत ने यह भी बताया कि इस केन्द्र में भारतीय अनुसंधान पद्धति को प्रोत्साहन मिलेगा और यह युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा की गहरी समझ प्रदान करेगा। उन्होंने डॉ. नित्यानंद हिमालयी शोध एवं अध्ययन केन्द्र और एमएससी अर्बन डेवलपमेंट मैनेजमेंट की प्रगति की भी समीक्षा की और विश्वविद्यालय को सेंटर फॉर एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने हेतु ठोस प्रयासों की आवश्यकता जताई।
बैठक में सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रणजीत सिन्हा, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, संयुक्त सचिव विक्रम सिंह यादव, उप सचिव ब्योमकेश दुबे, उप कुलसचिव दुर्गेश डिमरी, वित्त नियंत्रक स्मृति खंडूडी, अनुभाग अधिकारी भवानी राम आर्य, उप निदेशक दीपक पाण्डेय, शैलेन्द्र कुमार, मनोज बिष्ट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

