लिपूलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार शुरू, पहला भारतीय व्यापारिक दल तकलाकोट पहुंचा

पिथौरागढ़। जनपद पिथौरागढ़ के धारचूला स्थित ऐतिहासिक लिपूलेख दर्रे से वर्ष 2026 के भारत-चीन सीमा व्यापार का शनिवार को विधिवत शुभारंभ हो गया। व्यापार शुरू होने के साथ ही भारतीय व्यापारियों का पहला दल सफलतापूर्वक चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र स्थित तकलाकोट मंडी पहुंच गया, जहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद व्यापारिक गतिविधियां प्रारंभ कर दी गईं।
उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि 31 जुलाई की शाम भारत-तिब्बत व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रौकली के नेतृत्व में 16 पंजीकृत व्यापारी और 4 हेल्परों सहित कुल 20 सदस्य गुंजी स्थित इमीग्रेशन कार्यालय में आव्रजन प्रक्रिया पूरी करने के बाद नाबीढांग पहुंचे, जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया।
शनिवार सुबह करीब 10:15 बजे लिपूलेख दर्रे पर चीनी अधिकारियों द्वारा सभी औपचारिकताएं पूरी किए जाने के बाद भारतीय व्यापारियों ने तिब्बत की सीमा में प्रवेश किया और तकलाकोट मंडी पहुंचकर व्यापार का शुभारंभ किया।
प्रशासन के अनुसार, चीन की ओर से पहले चरण में केवल पूर्व से पंजीकृत और पहले भी व्यापार कर चुके व्यापारियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई है। इसी कारण पहला दल भारत से कोई नई व्यापारिक सामग्री लेकर नहीं गया। व्यापारी तकलाकोट में पहले से उपलब्ध अपने सामान के आधार पर व्यापार करेंगे।
उपजिलाधिकारी ने बताया कि आगामी व्यापारिक दलों के प्रस्थान की तिथियों के लिए चीनी प्रशासन के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। अनुमति मिलते ही अन्य पंजीकृत व्यापारियों को भी चरणबद्ध तरीके से तकलाकोट भेजा जाएगा।
सीमा व्यापार के पुनः प्रारंभ होने से सीमांत क्षेत्रों की पारंपरिक व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने के साथ स्थानीय व्यापारियों, सीमावर्ती क्षेत्रों की आजीविका और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है।

