फीस वृद्धि पर जिला प्रशासन की सख्ती के बाद निजी स्कूल आए बैकफ़ुट
देहरादून।जिला प्रशासन की आक्रामक कार्रवाई के चलते निजी स्कूल बैकफुट पर आ गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अभिभावकों और बच्चों के शोषण पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि स्वीकार्य नहीं होगी। जिला प्रशासन ने कई बड़े निजी स्कूलों की जांच शुरू कर दी है और यदि नियमों का पालन नहीं किया गया, तो लाइसेंस निरस्त कर स्कूलों को बंद किया जा सकता है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने शिक्षा माफियाओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। कुछ दिनों पहले चार बड़े पुस्तक भंडारों पर जीएसटी चोरी, बिना बिल के बिक्री और अनावश्यक सामग्री खरीदने के लिए विवश करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर दुकानों को सील कर दिया गया था। अब जिला प्रशासन की सख्ती के चलते एन मेरी स्कूल ने अपनी बढ़ी हुई फीस को 10 प्रतिशत तक सीमित करने की अंडरटेकिंग दी है, जो पहले 30 प्रतिशत तक बढ़ाई गई थी।
अभिभावकों की लगातार शिकायतों और विरोध प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन ने सभी निजी स्कूलों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है। मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों के साथ बैठक कर निर्देश दिए गए हैं कि फीस वृद्धि शासनादेश के अनुसार केवल तीन वर्षों में 10 प्रतिशत तक ही की जा सकती है। यदि कोई स्कूल इससे अधिक वृद्धि करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि पाठ्य-पुस्तकें खुले बाजार में कम दाम पर आसानी से उपलब्ध हों। विद्यालयों में उत्तर पुस्तिकाओं और कॉपियों पर स्कूल का नाम मुद्रित करने की प्रथा समाप्त की जाए, जिससे अभिभावक किसी भी विक्रेता से उन्हें खरीद सकें। इसके अलावा, सभी निजी विद्यालयों को अपनी वेबसाइट पर छात्र गणवेश की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यह खुले बाजार में किसी भी विक्रेता के पास उचित मूल्य पर मिल सके।
देहरादून जिले में संचालित सभी निजी विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्येक शैक्षिक सत्र में फीस वृद्धि संबंधी प्रस्ताव मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करें। मुख्य शिक्षा अधिकारी की स्वीकृति के बाद ही कोई भी शुल्क वृद्धि लागू की जाएगी। एन मेरी स्कूल, जीएमएस रोड को निर्देशित किया गया है कि 2025-26 सत्र में बढ़ाई गई फीस को अधिकतम 10 प्रतिशत तक सीमित किया जाए और अतिरिक्त शुल्क को अगले महीने की फीस में समायोजित किया जाए।
इसके अलावा, स्कूल प्रशासन को आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक मान्यता प्राप्त करने और विद्यालय की पैतृक सोसायटी परिवर्तन के लिए एक महीने के भीतर आवेदन करने का निर्देश दिया गया है। समर वैली स्कूल, देहरादून को निर्देश दिया गया है कि कक्षा 9 में प्रस्तावित शुल्क वृद्धि को अधिकतम 6 प्रतिशत तक सीमित किया जाए और पाठ्य-पुस्तकों व छात्र गणवेश की सूची अनिवार्य रूप से अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाए। इसी तरह, सेंट जोसेफ स्कूल, देहरादून को भी निर्देश दिया गया है कि वे तीन वर्षों में अधिकतम 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि न करें।
प्रशासन की इस सख्ती के बाद निजी स्कूलों में हड़कंप मचा हुआ है। कई स्कूल अपने फीस ढांचे की समीक्षा कर रहे हैं और आवश्यक संशोधन कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा को व्यापार नहीं बनने दिया जाएगा और यदि कोई विद्यालय निर्धारित मानकों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

