1952 से चली आ रही पुरानी टिहरी की रामलीला की गौरवगाथा समेटे ‘भव्य रामलीला महोत्सव 2026’ की स्मारिका का विमोचन

देहरादून। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून द्वारा पुरानी टिहरी की वर्ष 1952 से चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आयोजित किए जा रहे ‘भव्य रामलीला महोत्सव 2026’ की स्मारिका पुस्तिका का विमोचन किया गया। स्मारिका में पुरानी टिहरी की रामलीला की 1952 से अब तक की यात्रा, ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान उपलब्धियों को संजोया गया है।
स्मारिका का विमोचन समिति के संरक्षक मंडल के सदस्य एवं वर्ष 1961 से रामलीला के वरिष्ठ कलाकार बछेंद्र कुमार पांडेय ने किया। उल्लेखनीय है कि उन्होंने वर्ष 1973 में निभाए अपने किरदार को 50 वर्ष बाद वर्ष 2023 में पुनः रामलीला मंचन के दौरान निभाया था।
समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने बताया कि पुरानी टिहरी गढ़वाल की ऐतिहासिक राजधानी रही है। टिहरी बांध के निर्माण के बाद पुरानी टिहरी के जलमग्न होने के कारण यह ऐतिहासिक रामलीला अपनी मूल भूमि से दूर हो गई थी। सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से समिति ने वर्ष 2023 में 21 वर्ष के अंतराल के बाद देहरादून में रामलीला का पुनर्जीवन किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित रामलीला को विभिन्न देशों में डिजिटल माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। इस वर्ष आधुनिक तकनीक के माध्यम से रामलीला को एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस बार उत्तराखंड की माटी से जुड़े प्रसिद्ध ‘पंचतत्त्व बैंड’ की प्रस्तुति भी महोत्सव का विशेष आकर्षण होगी। 11 अक्टूबर को रामलीला मंचन के प्रथम दिवस उद्घाटन अवसर पर शाम छह बजे से पंचतत्त्व बैंड अपनी प्रस्तुति देगा।
अभिनव थापर ने कहा कि इस वर्ष महोत्सव में संस्कृति और आधुनिक तकनीक का विशेष संगम देखने को मिलेगा। लेजर एवं ध्वनि शो के माध्यम से गढ़वाल के गौरवशाली इतिहास को भव्य रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही सीधा डिजिटल प्रसारण, बड़ी डिजिटल स्क्रीन और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं के माध्यम से देश-विदेश में रहने वाले दर्शक भी रामलीला से जुड़ सकेंगे। हालांकि रामलीला की चौपाइयों, संवाद, कथा और पारंपरिक मंचन शैली में वर्ष 1952 से चली आ रही पुरानी टिहरी की मूल परंपरा को यथावत रखा जाएगा।
रामलीला मंचन के साथ भव्य कलश यात्रा, मेला, लोककला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या तथा रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन भी किया जाएगा। महोत्सव में देहरादून के साथ टिहरी, भटवाड़ी, उत्तरकाशी, ऋषिकेश सहित विभिन्न क्षेत्रों की रामलीलाओं के अनुभवी कलाकार भी प्रतिभाग करेंगे। गढ़वाली फिल्मों की प्रसिद्ध गायिकाओं एवं कलाकारों में ‘प्यारी निर्मला’ और ‘है लाली’ फेम शिवानी नेगी सहित अन्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
समिति के संरक्षक बछेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि महोत्सव की स्मारिका अतीत के गौरवशाली इतिहास और वर्तमान उपलब्धियों का अनूठा संगम है। महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड की लोककला, संस्कृति और पारंपरिक विरासत को व्यापक मंच प्रदान किया जाएगा।
समिति के सचिव अमित पंत ने बताया कि ‘भव्य रामलीला महोत्सव 2026’ का आयोजन 8 अक्टूबर से 25 अक्टूबर 2026 तक देहरादून के श्री गुरुनानक मैदान, रेसकोर्स में किया जाएगा। 8 अक्टूबर से भव्य मेले का शुभारंभ होगा। 9 अक्टूबर को घंटाघर से श्री गुरुनानक मैदान, रेसकोर्स तक भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। 11 से 21 अक्टूबर तक रामलीला का मंचन होगा। 20 अक्टूबर को रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद एवं लंका के पारंपरिक पुतलों का दहन किया जाएगा, जबकि 21 अक्टूबर को भगवान श्रीराम का भव्य राजतिलक आयोजित होगा।
उन्होंने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य गढ़वाल, कुमाऊं और उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ही प्रदेश से बाहर रहने वाले प्रवासियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। समिति पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला की परंपरा, संस्कृति, संवाद और मंचन शैली को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
स्मारिका विमोचन कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर, सचिव अमित पंत, संरक्षक बछेंद्र कुमार पांडेय, नरेश कुमार, सह-सचिव गिरीश पैन्यूली, उपाध्यक्ष दुर्गा भट्ट, नीता बहुगुणा, अजय पैन्यूली, तपेंद्र चौहान, शिवानी नेगी, अनिल नौटियाल, जयेन्द्र पांडे, गबर, केशव सहित समिति के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
