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उत्तराखंड के युवा स्थानीय चुनौतियों को उद्यमों में और विचारों को आजीविका में बदलें: प्रो. सुरेखा डंगवाल

उत्तराखंड के युवा स्थानीय चुनौतियों को उद्यमों में और विचारों को आजीविका में बदलें: प्रो. सुरेखा डंगवाल
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देहरादून। दून विश्वविद्यालय में देवभूमि उद्यमिता योजना (डीयूवाई) के अंतर्गत भूगोल विभाग के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय उद्यमिता अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्यमिता, नवाचार और स्वरोजगार को करियर के अवसरों के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की पहल देवभूमि उद्यमिता योजना का क्रियान्वयन भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई) द्वारा किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच विकसित करना तथा उन्हें अपना उद्यम स्थापित करने के लिए उपलब्ध संसाधनों, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग से परिचित कराना है।

दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने उत्तराखंड के युवाओं की क्षमता को रेखांकित करते हुए स्थानीय चुनौतियों को उद्यमिता के अवसरों में बदलने और अपने साथ दूसरों के लिए भी आजीविका सृजित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों को आवश्यक ज्ञान, आत्मविश्वास और सहयोग प्रदान करें, ताकि उनके संभावनाशील विचार सार्थक उद्यमों का रूप ले सकें।

उन्होंने आगे कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को विद्यार्थियों को रोजगार के साथ-साथ नेतृत्व, नवाचार, उद्यम स्थापना और समस्या समाधान के लिए भी तैयार करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और उद्यमशील दृष्टिकोण विकसित करने के प्रति दून विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम का आयोजन दून विश्वविद्यालय के भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. बी. एस. बिष्ट के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को उभरते करियर अवसरों से परिचित कराने तथा उनके अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक और नवाचारी समाधानों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। सतत पर्यटन, भू-स्थानिक सेवाओं, पर्यावरण प्रबंधन और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में उद्यमिता की संभावनाओं को समझने के लिए भूगोल का अध्ययन एक महत्त्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

दून विश्वविद्यालय के डीयूवाई नोडल अधिकारी प्रो. सुधांशु जोशी ने बताया कि उद्यमिता में समस्याओं की पहचान, नवाचारी समाधान विकसित करना तथा सामाजिक और आर्थिक मूल्य का सृजन शामिल है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उद्यमिता योजना विद्यार्थियों को जागरूकता, मार्गदर्शन, मेंटरिंग और संस्थागत सहयोग प्रदान करती है, जिससे वे अपने संभावनाशील विचारों को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ उद्यमों में बदल सकें। उन्होंने विद्यार्थियों को उत्तराखंड के स्थानीय संसाधनों और समुदायों की आवश्यकताओं से जुड़े अवसरों की तलाश करने के लिए प्रेरित किया।

भूगोल विभाग की डॉ. पल्लवी उप्रेती ने उभरते उद्यमिता क्षेत्रों और स्थानीय विकास की चुनौतियों के समाधान में भूगोल संबंधी ज्ञान एवं कौशल की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग से विद्यार्थी अपने नवाचारी विचारों को स्टार्टअप और स्वरोजगार की पहल में बदल सकते हैं।

अभिमुखीकरण सत्र का संचालन डीयूवाई की परियोजना अधिकारी सुश्री सपना नेगी ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्यमशील सोच, व्यवसाय के अवसरों की पहचान, स्टार्टअप विकास, स्वरोजगार तथा भावी उद्यमियों के लिए उपलब्ध संस्थागत सहायता व्यवस्थाओं से परिचित कराया।

संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं की पहचान करने और ऐसे नवाचारी समाधान तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिनसे सामाजिक और आर्थिक लाभ उत्पन्न हो सकें। विद्यार्थियों ने चर्चा में सक्रिय भागीदारी की तथा उद्यमिता, स्टार्टअप विकास और स्वरोजगार के अवसरों में रुचि व्यक्त की।

कार्यक्रम का समापन उद्यमिता और नवाचार में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, विश्वविद्यालयों में उद्यमशील संस्कृति विकसित करने तथा विद्यार्थियों को रोजगार सृजनकर्ता बनकर उत्तराखंड के आर्थिक विकास में योगदान देने के आह्वान के साथ हुआ।

देवभूमि खबर

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