उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शहीद मेमोरियल फुटबॉल चैंपियनशिप 2025 में अंडर-12 में पहाड़ी बॉयज़ ऋषिकेश, अंडर-17 में डीएफए देहरादून और यूके मास्टर्स ने मारी बाज़ी
देहरादून फुटबॉल एकेडमी (डीएफए), खेलो मास्टर्स गेम्स फाउंडेशन और उत्तराखंड राज्य के सहयोग से आयोजित उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शहीद मेमोरियल फुटबॉल चैंपियनशिप 2025 का सफल आयोजन 17-18 मई को डीएफए फुटबॉल ग्राउंड, गुलरघाटी रोड, भागीरथी एन्क्लेव में किया गया। आयोजन का नेतृत्व डीएफए के संस्थापक अध्यक्ष, खेलो मास्टर्स गेम्स फाउंडेशन उत्तराखंड के महासचिव और स्वयं राज्य आंदोलनकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह रावत ने किया। उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य 1994 के उत्तराखंड आंदोलन में शहीद हुए 42 आंदोलनकारियों को याद करना और उन सभी आंदोलनकारियों को सम्मानित करना था, जिन्होंने अलग राज्य की मांग के लिए संघर्ष किया।
प्रतियोगिता में राज्यभर से अंडर-12 में 10 टीमों, अंडर-17 बालक वर्ग में 12 टीमों, बालिका वर्ग में 4 टीमों, 45 प्लस में 10 टीमों और 60 प्लस वर्ग में 4 टीमों ने भाग लिया। अंडर-12 वर्ग में पहाड़ी बॉयज़ एफसी ऋषिकेश ने डीएफए देहरादून को 2-1 से हराकर खिताब अपने नाम किया, जिसमें बेस्ट प्लेयर का पुरस्कार अंकित को मिला। अंडर-17 बालक वर्ग में देहरादून फुटबॉल एकेडमी ने दून डिफेंस एकेडमी को कड़े मुकाबले में 3-2 से हराया, और डीएफए के गोलकीपर आशुतोष भट्ट को बेस्ट प्लेयर चुना गया। अंडर-17 बालिका वर्ग में दून डिफेंस एकेडमी ने डीडीए को 2-1 से मात दी, जिसमें नितिका को बेस्ट प्लेयर घोषित किया गया।
वरिष्ठ वर्ग में 45 प्लस कैटेगरी में यूके मास्टर्स ने हिमालयन एफसी ऋषिकेश को 2-0 से हराया और युद्ध क्षेत्री को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब मिला। 60 प्लस वर्ग में यूके मास्टर्स ने टाई ब्रेकर में डीएफए खेलो मास्टर्स उत्तराखंड को 3-2 से पराजित किया, जिसमें पीसी खंतवाल को बेस्ट प्लेयर चुना गया।
समापन अवसर पर वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रविन्द्र जुगराण, जगमोहन सिंह नेगी, प्रदीप कुकरेती, सुलोचना, शांति प्रसाद भट्ट समेत 30 आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया और विजेता व उपविजेता टीमों को ट्रॉफी, मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। दून डिफेंस एकेडमी के निदेशक संदीप गुप्ता का प्रतियोगिता में विशेष योगदान रहा। डीएफए की ओर से सभी खिलाड़ियों के लिए भोजन और चाय की उत्तम व्यवस्था की गई थी।
रेफरी के रूप में हर्षित चौहान, हिमांशु प्रजापति, वरुण चौहान, सत्य जोशी, सुरेंद्र रावत, विमल रावत और मनोज नेगी ने जिम्मेदारी संभाली। डॉ. रावत ने बताया कि यह आयोजन 2003 से 2018 तक नियमित हुआ और इस वर्ष फिर से इसे पुनः प्रारंभ किया गया है। भविष्य में भी यह आयोजन जारी रहेगा ताकि नई पीढ़ी को उत्तराखंड आंदोलन की गौरवशाली स्मृति से जोड़ा जा सके।

