प्रदेश पर 20 सालों में 70 हजार करोड़ कर्ज का बोझ : भावना पांडेय

प्रदेश पर 20 सालों में 70 हजार करोड़ कर्ज का बोझ  : भावना पांडेय
Spread the love

देहरादून। राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने कहा है कि प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। पिछले 20 साल में अब तक 70 हजार करोड़ का कर्ज हो चुका है। यानी प्रदेश में जो बच्चा पैदा भी नहीं हुआ उस पर भी 56 हजार रुपये का कर्ज है। उन्होंने कहा कि यह शोध का विषय है कि प्रदेश कर्ज में डूबा क्यों? क्या हमने राज्य में इंडस्ट्रीज लगाईं, पावर प्रोजेक्ट लगाए या हर जिले में स्मार्ट सिटी बना दी। उन्होंने आशंका जतायी कि जिस प्रकार प्रदेश में घोटाले होते हैं और भ्रष्टाचार का बोलबाला है तो कहीं पैसा स्विस बैंकों में तो नहीं चला गया?

राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने कहा कि जब प्रदेश कर्ज में है तो नेताओं को वेतन क्यों दिया जा रहा है? सरकार को नेताओं का वेतन रोकना चाहिए जबकि सरकार आंगनबाड़ी, भोजनमाता, आशाओं और अन्य संविदाकर्मियों को कई -कई महीने वेतन नहीं देती। उन्होंने कहा कि सरकार को इन कर्मचारियों को वेतन बढ़ाकर देना चाहिए। इनके पास वेतन के अलावा गुजारे के लिए और कोई तरीका नहीं है जबकि नेताओं के पास कमाई का विकल्प है। ऐसे में नेताओं का वेतन रोका जाना चाहिए। भावना पांडे ने पूर्व सीएम हरीश रावत से पूछा कि आखिर प्रदेश की इस बदहाली का जिम्मेदार कौन है?
समाजसेवी और उद्यमी भावना पांडे ने कहा कि अपना वेतन बढ़ाने के लिए पक्ष-विपक्ष के नेता एकजुट हो जाते हैं, लेकिन जनता के कार्यो और विकास के लिए एकजुट नहीं होते। डिपार्टमेंट का वेतन रोक दिया जाता है लेकिन नेताओं का वेतन नहीं रोका जाता? क्यों? उनके वेतन को भी रोका जाना चाहिए। आज प्रदेश के नेताओं के पास अथाह दौलत है, बंगले हैं, बेशकीमती और विदेश से आयातित सामान से उनकी कोठियां जगमगाती हैं और प्रदेश की जनता झुग्गियों में रहती है। नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं, इम्पोर्टिड कारों में घूमते हैं लेकिन आम आदमी का बच्चे के लिए सरकारी स्कूल हैं जिसकी छत टपकती है और मास्टरों का टोटा है। आखिर यह विपन्नता क्यों आई? इस आर्थिक भेदभाव का जिम्मेदार कौन है?

राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने नेताओं को चेताया कि प्रदेश की मातृशक्ति और युवाशक्ति अब नेताओं और अफसरों द्वारा संसाधनों की लूट-खसोट नहीं सहेंगे। भ्रष्टाचार और घोटालेबाजों को जनता सबक सिखाने का काम करेगी।

देवभूमि खबर

Related articles