प्रधानमंत्री स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी में दिखेगी उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, केदारनाथ से मुखबा मंदिर तक के मॉडल शामिल

27 स्मृति चिह्नों में देवभूमि की आस्था, ऐपन कला और लोक संस्कृति की झलक, नीलामी से मिलने वाली राशि नमामि गंगे कार्यक्रम को दी जाएगी
देहरादून। आठवीं प्रधानमंत्री स्मृति चिह्न ई-नीलामी में उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस नीलामी में प्रदर्शित 27 स्मृति चिह्नों के संग्रह में देवभूमि के प्रमुख तीर्थस्थलों, पारंपरिक लोक कला, क्षेत्रीय पहचान और खेल उपलब्धियों की झलक देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री को भेंट किए गए इन स्मृति चिह्नों में मंदिरों के मॉडल, फ्रेमयुक्त कलाकृतियां, फोटो प्रिंट और अन्य यादगार वस्तुएं शामिल हैं। नीलामी से प्राप्त धनराशि नमामि गंगे कार्यक्रम के माध्यम से गंगा संरक्षण के कार्यों में सहयोग के लिए दी जाएगी।

संग्रह में उत्तराखंड के चार प्रमुख मंदिरों के मॉडल शामिल किए गए हैं। इनमें श्री केदारनाथ धाम के दो मॉडल, उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर का एक मॉडल और मुखबा स्थित गंगा जी मंदिर का लकड़ी से निर्मित मॉडल शामिल है। ये स्मृति चिह्न प्रदेश में तीर्थयात्रा, धार्मिक आस्था और मंदिरों की सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाते हैं।
उत्तराखंड के चारों धाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को एक साथ दर्शाने वाला फोटो प्रिंट भी इस संग्रह का हिस्सा है। इसके अलावा हरिद्वार की मनसा देवी मंदिर की फ्रेमयुक्त तस्वीर, आदि कैलाश का दृश्य, महासू देवता मंदिर का चित्र और कार्तिक स्वामी मंदिर को दर्शाने वाला एलईडी रोशनी से युक्त कांच का स्मृति चिह्न भी शामिल है। नारायण आश्रम और कुमाऊं हिमालय को दर्शाने वाले प्रिंट प्रदेश के पर्वतीय प्राकृतिक परिवेश और आध्यात्मिक परंपरा को सामने लाते हैं।

संग्रह में उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला ऐपन को भी विशेष स्थान दिया गया है। ऐपन कला से सजी दीवार घड़ी और मां दुर्गा को दर्शाने वाली कलाकृति राज्य की पारंपरिक कलात्मक शैली तथा धार्मिक प्रतीकों के महत्व को उजागर करती हैं। इसके साथ ही सात उत्तराखंडी एवं पहाड़ी टोपियां भी शामिल हैं, जो प्रदेश की क्षेत्रीय पहचान और पारंपरिक वेशभूषा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के साथ इस संग्रह में उत्तराखंड के बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन का हस्ताक्षर किया हुआ बैडमिंटन रैकेट भी शामिल है। यह स्मृति चिह्न प्रदेश की खेल प्रतिभा और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी उपलब्धियों को प्रदर्शित करता है।
मुखबा स्थित गंगा जी मंदिर का मॉडल इस पहल को गंगा संरक्षण के उद्देश्य से भी जोड़ता है। गंगा नदी उत्तराखंड की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में इन स्मृति चिह्नों की नीलामी से प्राप्त धनराशि का नमामि गंगे कार्यक्रम में उपयोग किया जाना गंगा के पुनरुद्धार और संरक्षण के प्रयासों को सहयोग प्रदान करेगा।
आठवीं प्रधानमंत्री स्मृति चिह्न ई-नीलामी की अवधि 31 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है। इच्छुक व्यक्ति आधिकारिक पोर्टल https://pmmementos.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन बोली लगा सकते हैं। इस पहल के जरिए प्रधानमंत्री को भेंट किए गए स्मृति चिह्नों को प्राप्त करने का अवसर मिलने के साथ ही गंगा संरक्षण के कार्यों में योगदान देने का भी अवसर मिलेगा।


