रुद्रप्रयाग में एक और फर्जी शिक्षक को 5 वर्ष का कठोर कारावास, अब तक 28 को मिली सजा
रुद्रप्रयाग। बीएड की फर्जी डिग्री के आधार पर शिक्षा विभाग में नौकरी करने के मामले में जनपद रुद्रप्रयाग के एक और फर्जी शिक्षक को अदालत ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। जनता इंटर कॉलेज, देवनगर रुद्रप्रयाग में तैनात रहे शिक्षक लक्ष्मण सिंह रौथाण पुत्र केदार सिंह रौथाण ने वर्ष 2003 की फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी।
शिक्षा विभाग, एसआईटी और विभागीय जांच के क्रम में जब उसकी डिग्री का सत्यापन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ, उत्तर प्रदेश से कराया गया, तो यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित शिक्षक को ऐसी कोई डिग्री विश्वविद्यालय द्वारा निर्गत नहीं की गई थी। इसके बाद उसे तत्काल निलंबित कर बर्खास्त कर दिया गया। शिक्षा विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया और शासन स्तर पर भी एसआईटी जांच कराई गई।
इस मामले में विचारण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रुद्रप्रयाग श्री अशोक कुमार सैनी की अदालत में हुआ। दिनांक 15 जुलाई 2025 को न्यायालय ने आरोपी लक्ष्मण सिंह रौथाण को फर्जी बीएड डिग्री के आधार पर छलपूर्वक नौकरी प्राप्त करने का दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के अंतर्गत 5 वर्ष का कठोर कारावास व 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा धारा 471 के अंतर्गत भी दोषी मानते हुए न्यायालय ने 2 वर्ष का कठोर कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा दी, जिसमें जुर्माना न देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार पुरसाड़ी, चगोली भेजा गया है। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से प्रभारी पैरवी विद्वान अभियोजन अधिकारी प्रमोद चन्द्र आर्य द्वारा की गई।
प्रभारी अभियोजन अधिकारी ने बताया कि जनपद रुद्रप्रयाग में अब तक पंजीकृत 28 फर्जी शिक्षकों में से सभी को न्यायालय द्वारा दोषी करार देते हुए सजा सुनाई जा चुकी है। न्यायालय के इस निर्णय की प्रति सचिव शिक्षा एवं सचिव गृह उत्तराखण्ड को आवश्यक विभागीय कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
इस पूरे प्रकरण से शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही भी उजागर हुई है, जहां बिना सत्यापन के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षकों को नियुक्ति, स्थायीकरण व यहां तक कि प्रोन्नति तक दे दी गई।

