रम्मीकल्चर ऐप मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 442.35 करोड़ की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क

बेंगलुरु। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने रम्मीकल्चर ऐप एवं अन्य से जुड़े मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत करीब 442.35 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। ईडी ने 25 सितंबर 2026 को पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर संख्या 40/2026 जारी किया।
ईडी के अनुसार कुर्क की गई संपत्तियों में सावधि जमा में जमा राशि, व्यावसायिक दुकानें, एक विला और कई आवासीय अचल संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारकों के परिवार के सदस्यों, निजी पारिवारिक ट्रस्टों और विभिन्न संबद्ध संस्थाओं के नाम पर रखी गई थीं।
ईडी ने तेलंगाना में कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत धोखाधड़ी के आरोपों में दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर पीएमएलए के तहत जांच शुरू की थी। ईडी के मुताबिक संबंधित अपराध पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध हैं।
जांच के तहत ईडी ने 7 से 14 मई 2026 और 20 से 21 जून 2026 के दौरान गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय तथा उसके निदेशकों और प्रमुख कर्मचारियों के आवासीय परिसरों पर पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की थी। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बरामद किए गए, जिन्हें जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया गया है।
ईडी की जांच के अनुसार गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और रम्मीटाइम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड मोबाइल एप के माध्यम से रियल मनी गेम्स, विशेष रूप से ऑनलाइन रम्मी गेम और टूर्नामेंट संचालित कर रही थीं। रम्मीकल्चर, रम्मीप्राइम, प्लेशिप और रम्मीटाइम सहित विभिन्न ब्रांडों के माध्यम से संचालित इन मंचों का देशभर में करीब तीन करोड़ उपयोगकर्ताओं का आधार था।
ईडी के अनुसार इन उपयोगकर्ताओं में बड़ी संख्या उन राज्यों से थी, जहां ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध था। कंपनियां उपयोगकर्ताओं द्वारा जमा की गई दांव की राशि पर 10 से 15 प्रतिशत तक प्लेटफॉर्म कमीशन लेती थीं। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि उपयोगकर्ताओं को प्लेटफॉर्म पारदर्शी, निष्पक्ष और स्वचालित खिलाड़ियों से मुक्त होने का भरोसा दिया गया, जबकि कथित तौर पर उनकी जानकारी या सहमति के बिना बॉट्स यानी स्वचालित कार्यक्रमों एवं एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया गया। ईडी के मुताबिक इससे उपयोगकर्ताओं को वित्तीय नुकसान हुआ और कंपनियों के लिए अपराध से अर्जित आय उत्पन्न हुई।
जांच में कंपनियों द्वारा उपयोगकर्ताओं को जोड़ने और बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रचार एवं प्रोत्साहन रणनीतियां अपनाए जाने की बात भी सामने आई है। ईडी के अनुसार नए उपयोगकर्ताओं को बोनस, रेफरल प्रोत्साहन, मुफ्त टूर्नामेंट प्रवेश और प्रचारात्मक पुरस्कारों के माध्यम से लगातार गेम खेलने तथा अधिक राशि जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कंपनियों ने विपणन एवं प्रचार अभियानों पर करीब 1,035 करोड़ रुपये खर्च किए।
ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में निकासी पर 5 से 10 प्रतिशत तक शुल्क लगाया गया तथा ‘सुपर बूस्टर’ जैसे प्रस्तावों के जरिए उपयोगकर्ताओं को निकासी योग्य राशि को गैर-निकासी योग्य ‘गेम कैश’ में बदलने के लिए प्रेरित किया गया। भारी वित्तीय नुकसान के बाद गेम खेलना बंद कर चुके निष्क्रिय उपयोगकर्ताओं को भी तत्काल नकद क्रेडिट, प्रचार प्रस्ताव, मोबाइल संदेश और दूरभाष अभियानों के माध्यम से दोबारा गेमिंग के लिए प्रेरित किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
जांच के अनुसार कथित अपराध से अर्जित आय को लाभांश भुगतान और शेयरों की पुनर्खरीद के माध्यम से शेयरधारकों तक पहुंचाया गया। इसके बाद कथित आय को म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, परिवर्तनीय नोट, इक्विटी शेयर, चल संपत्तियों और उच्च मूल्य की अचल संपत्तियों में निवेश किया गया। इनमें पारिवारिक ट्रस्टों और संबद्ध संस्थाओं के माध्यम से रखी गई संपत्तियां भी शामिल थीं।
ईडी के अनुसार पूर्व में तलाशी के दौरान पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत करीब 495 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां फ्रीज की गई थीं। इसके अलावा 11 लाख रुपये की नकदी तथा करीब 2.30 किलोग्राम वजन के सोने-हीरे के आभूषण एवं बुलियन जब्त किए गए थे। इससे पहले करीब 1,906 करोड़ रुपये की संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया गया था।
ईडी के मुताबिक अब तक की जांच के दौरान कुर्क, फ्रीज और जब्त की गई कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 2,843 करोड़ रुपये हो गया है।
