सेंट जोसेफ एकेडमी पर सरकार के यू-टर्न पर गरिमा दसौनी की कड़ी प्रतिक्रिया
देहरादून। सेंट जोसेफ एकेडमी को लेकर राज्य सरकार के अचानक यू-टर्न पर उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार की नीतियों और निर्णयों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह फैसला राज्य के शिक्षा व्यवस्था को पीछे धकेलने का प्रतीक है। दसौनी ने कहा कि जिस समाज में शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाती, उस समाज का विकास संभव नहीं होता। लेकिन उत्तराखंड में शिक्षण संस्थानों के बजाय पार्किंग जैसे अवांछित कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
गरिमा दसौनी ने राज्य सरकार की शिक्षा नीतियों पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि देश के 36 केंद्र शासित राज्यों और पूर्ण राज्यों में शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड का स्थान 34वां है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यह गर्व की बात है या शर्म की? ऐसे समय में जब राज्य को शिक्षा में सुधार की सख्त जरूरत है, सरकार दशकों पुराने नामी शिक्षण संस्थानों को बंद करके वहां पार्किंग खोलने की योजना बना रही है।
सरकार की ओर से यह कहा गया था कि सेंट जोसेफ एकेडमी की 90 साल की लीज खत्म हो गई थी, इसलिए इसे बंद करने का निर्णय लिया गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दसौनी ने कहा कि यदि लीज समाप्त हो गई थी, तो उसे नवीनीकृत किया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह निर्णय राजनीतिक लाभ और अपने नेताओं के प्रतिष्ठानों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से लिया।
हालांकि, इस फैसले पर जनाक्रोश और विरोध के बाद सरकार ने 24 घंटे के भीतर यू-टर्न ले लिया, जिससे शासन की जमकर किरकिरी हुई। दसौनी ने इसे सरकार की अयोग्यता का उदाहरण बताया और कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से अव्यवस्थित और अपरिपक्व था।
गरिमा दसौनी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सलाहकारों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने ऐसे सलाहकार रख लिए हैं, जो न केवल नौसिखिए हैं, बल्कि ऐसे फैसले करवा रहे हैं जो राज्य के हित में नहीं हैं। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जो सरकार दशकों पुराने प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को बंद करने का सपना देख रही हो, उसे “बैल बुद्धि” न कहा जाए तो क्या कहा जाए?
दसौनी ने राज्य सरकार से मांग की कि वह शिक्षा के प्रति अपनी नीति में बदलाव लाए और शिक्षण संस्थानों को बंद करने के बजाय उन्हें बढ़ावा दे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य को, जो पहले से ही शिक्षा के मामले में पिछड़ा हुआ है, इस तरह के फैसलों से और नुकसान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सेंट जोसेफ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का महत्व केवल शिक्षा में ही नहीं, बल्कि राज्य के सांस्कृतिक और सामाजिक विकास में भी है।
