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यूआईआईडीबी पर उठ रहे सवालों पर सरकार का जवाब, प्रचारित दावों को बताया तथ्यहीन

यूआईआईडीबी पर उठ रहे सवालों पर सरकार का जवाब, प्रचारित दावों को बताया तथ्यहीन
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देहरादून। उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (UIIDB) को लेकर उठ रहे सवालों और विभिन्न माध्यमों से प्रचारित की जा रही जानकारियों पर सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य सरकारी भूमि की मनमानी बिक्री करना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर निवेश, रोजगार और राज्य के राजस्व में वृद्धि करना है। इसके लिए एसेट मॉनेटाइजेशन और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है।

प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को अगले स्तर तक ले जाने और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूर्व में विस्तृत अध्ययन कराया गया था। इसमें उपलब्ध सरकारी भूमि का उत्पादक उपयोग कर पर्यटन, उद्योग, हॉस्पिटैलिटी और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाशी गईं। इसका उद्देश्य नए निवेश आकर्षित करने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना और सरकार की आय बढ़ाना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में इस प्रक्रिया के तहत बहुत सीमित संख्या में भूमि खंड चिह्नित किए गए हैं। अगले दो से तीन महीनों के भीतर लगभग 6-7 चयनित लैंड पार्सल की बिडिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसके विपरीत जिस तरह बड़ी संख्या में सरकारी जमीनों को इस योजना में शामिल बताकर प्रचार किया जा रहा है, वह वास्तविक तथ्यों के अनुरूप नहीं है।

प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन, प्राकृतिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और वेलनेस टूरिज्म की व्यापक संभावनाएं हैं। ऐसे में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में योजनाबद्ध निवेश से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।

उनके अनुसार, प्रस्तावित निवेश से लगभग 7,000 से 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और 10,000 से 15,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा जीएसटी एवं अन्य माध्यमों से राज्य को प्रतिमाह लगभग 300 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि इस निवेश का लाभ केवल होटल और रिसॉर्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय किसानों, फल एवं सब्जी उत्पादकों, टैक्सी संचालकों, परिवहन व्यवसायियों, हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों, दुकानदारों और होमस्टे संचालकों को भी मिलेगा।

प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने उन विभिन्न स्थानों की जमीनों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की, जिन्हें UIIDB की प्रस्तावित योजना से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि चौबटिया की भूमि की व्यवहार्यता का परीक्षण किया गया था, लेकिन उपयुक्त संभावनाएं नहीं मिलने के कारण इसे प्रस्ताव से हटा दिया गया। इसी प्रकार धनोल्टी की भूमि वन भूमि होने के कारण प्रस्ताव से ड्रॉप कर दी गई थी।

एचएमटी की भूमि के संबंध में उन्होंने कहा कि यह भूमि सिडकुल के पास है और सिडकुल अपनी योजनाओं के अनुसार इस पर कार्य कर रहा है। इसका UIIDB की वर्तमान प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।

ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल की भूमि के संबंध में उन्होंने बताया कि यह वन भूमि है और अभी तक राज्य सरकार के किसी विभाग को हस्तांतरित भी नहीं हुई है। इसलिए इसे UIIDB की प्रस्तावित प्रक्रिया से जोड़ना तथ्यों के विपरीत है।

पीडब्ल्यूडी के रेस्ट हाउसों को लेकर हो रही चर्चाओं पर भी उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें से कई परिसंपत्तियों के संबंध में न तो मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिली है और न ही UIIDB बोर्ड की ओर से कोई अनुमोदन दिया गया है।

प्रमुख सचिव ने कहा कि इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य उत्तराखंड के युवाओं को उनके अपने राज्य में रोजगार उपलब्ध कराना है। प्रदेश के अनेक युवा हॉस्पिटैलिटी और होटल प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण उन्हें दूसरे राज्यों और विदेशों में रोजगार तलाशना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं मौजूद हैं, तो उनका लाभ स्थानीय युवाओं को मिलना चाहिए। इससे युवा अपने परिवार के बीच रहकर रोजगार प्राप्त कर सकेंगे और उनकी प्रतिभा का लाभ राज्य की अर्थव्यवस्था को मिलेगा।

प्रमुख सचिव ने कहा कि आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से प्राप्त राजस्व का उपयोग सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन सुविधाओं और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास में किया जा सकता है। इससे प्रदेश की वित्तीय क्षमता मजबूत होगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि UIIDB के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों को लेकर चर्चा तथ्यों और वास्तविक प्रस्तावों के आधार पर होनी चाहिए। जिन जमीनों को प्रस्ताव से हटाया जा चुका है अथवा जिनका वर्तमान प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है, उन्हें योजना का हिस्सा बताकर भ्रम पैदा करना उचित नहीं है।

प्रमुख सचिव ने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के संसाधनों का बेहतर उपयोग कर निवेश आकर्षित करना, युवाओं को रोजगार देना और उत्तराखंड को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। यह पूरी पहल राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर की जा रही है।

देवभूमि खबर

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