हादिसा दर हादिसा हो चौंकता कोई नहीं”: राष्ट्रीय कवि संगम की महिला इकाई ने आयोजित की भावपूर्ण काव्य गोष्ठी

हादिसा दर हादिसा हो चौंकता कोई नहीं”: राष्ट्रीय कवि संगम की महिला इकाई ने आयोजित की भावपूर्ण काव्य गोष्ठी
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देहरादून। राष्ट्रीय कवि संगम की महिला इकाई की ओर से रविवार को विधानसभा रोड स्थित ‘गुफ्तगू बुक एंड कॉफी बार’ में एक प्रेरणादायक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें प्रेम, देशभक्ति और समाज के विविध रंगों से सजी रचनाओं ने श्रोताओं के मन को छू लिया।

गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था की अध्यक्ष मीरा नवेली ने की और संचालन सतेंद्र शर्मा ‘तरंग’ ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत नीरू गुप्ता ‘मोहिनी’ द्वारा सरस्वती वंदना से हुई।

इस अवसर पर मीरा नवेली की रचना “अब तक सुनाई थी बंसी कन्हाई, अब है सुदर्शन चक्र की बारी” ने वर्तमान हालात को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए प्रभाव डाला। वहीं, वरिष्ठ शायर अंबर खरबंदा ने “हादिसा दर हादिसा हो चौंकता कोई नहीं” कहकर सामाजिक संवेदनाओं की गहराई छूई।

कवि श्रीकांत श्री, दर्द गढ़वाली, केडी शर्मा, शिवशंकर कुशवाहा, शिव मोहन सिंह, कुमार विजय ‘द्रोणी’, सतेन्द्र शर्मा ‘तरंग’, महिमा श्री, जसवीर सिंह हलधर, नीरज नैथानी, शिवचरण शर्मा ‘मुज़्तर’, तसनीमा कौसर सहित कई कवियों ने अपनी भावनात्मक और विचारोत्तेजक रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी।

कविता प्रेमियों से भरी इस महफ़िल में जहां देशभक्ति का स्वर गूंजा, वहीं मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक चिंतन की गहराई भी स्पष्ट रूप से झलकी। आयोजन ने साहित्य और समाज के बीच सेतु का कार्य करते हुए एक सार्थक पहल का रूप लिया।

देवभूमि खबर

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