राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण पर आक्रोश, स्थापना दिवस के बाद सरकार के घेराव की चेतावनी

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच ने राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी है। मंच ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य स्थापना दिवस तक चिन्हीकरण के मामले में धरातल पर कार्य शुरू नहीं हुआ और गैरसैंण में प्रस्तावित दो दिवसीय सत्र के दौरान आंदोलनकारियों की समस्याओं पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो स्थापना दिवस के बाद सरकार का घेराव किया जाएगा।
रविवार, 25 अक्टूबर को शहीद स्मारक में मंच की बैठक आयोजित की गई। बैठक का संचालन संयोजक पूरण सिंह लिंगवाल ने किया, जबकि अध्यक्षता प्रदेश महामंत्री रामलाल खंडूड़ी ने की। बैठक में राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण में हो रही देरी और राज्य स्थापना दिवस की तैयारियों पर चर्चा की गई।
चिन्हीकरण में देरी पर जताया आक्रोश
वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी पुष्पलता सीलमाना, अरुणा थपलियाल और तारा पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। उनके अनुसार, शासन स्तर से दो बार शासनादेश जारी होने के बाद भी अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए हैं। इससे राज्य आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी मातृशक्ति की भावनाओं का सम्मान नहीं किया गया तो उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, सुरेश नेगी और संयोजक पूरण सिंह लिंगवाल ने कहा कि गैरसैंण में होने वाले दो दिवसीय सत्र में राज्य आंदोलनकारियों के मामलों पर सकारात्मक पहल होनी चाहिए। यदि उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो राज्य स्थापना दिवस के बाद संगठन आंदोलन तेज करेगा और सरकार से घोषणाओं तथा आश्वासनों पर जवाब मांगेगा।
9 नवंबर को शहीद स्मारक पर जुटेंगे आंदोलनकारी
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी और प्रदेश महामंत्री रामलाल खंडूड़ी ने सभी राज्य आंदोलनकारियों से 9 नवंबर को सुबह 10 बजे शहीद स्मारक पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस पर आंदोलनकारी शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें आंदोलनकारियों के परिवारों के सदस्य भी प्रस्तुतियां देंगे। इस अवसर पर पारंपरिक गढ़भोज का आयोजन होगा, जिसमें तोर की दाल, भात और झंगोरे की खीर परोसी जाएगी।
मंच ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस तक सरकार और शासन की कार्यशैली पर नजर रखी जाएगी। यदि आंदोलनकारियों के हितों से जुड़े मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो उनके अधिकारों के लिए व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
बैठक में जगमोहन सिंह नेगी, रामलाल खंडूड़ी, पूरण सिंह लिंगवाल, प्रदीप कुकरेती, सुरेश नेगी, मोहन सिंह रावत, चंद्र किरण राणा, सुरेंद्र रावत, हरी सिंह मेहर, धर्मानंद भट्ट, विवेक बलोदी, पुष्पलता सीलमाना, अरुणा थपलियाल, राधा तिवारी, तारा पांडे, यशोदा रावत, राजेश्वरी नेगी, वीरेंद्र रावत, क्रांति अभिषेक, आकाश रावत, विनोद असवाल, खुशपाल सिंह परमार, बलबीर सिंह नेगी, सुशील विरमानी, सुधीर नारायण शर्मा, रेवती बिष्ट, पुष्पा रावत, पुष्पा ममगाईं, महेश्वरी कंडारी, सुशीला चंदोला, दुर्गा ध्यानी, संगीता रावत, विकास रावत, प्रभात डंडरियाल, प्रभाकर डबराल, पुष्कर बहुगुणा, बीरा रावत, सुबोधनी बट्ट, शकुंतला असवाल और रामप्यारी इष्टवाल सहित अन्य राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।


