भारत का रेशम उत्पादन 2030-31 तक 60 हजार मीट्रिक टन करने का लक्ष्य: गिरिराज सिंह

बेंगलुरु। केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने बेंगलुरु स्थित यूएएस-जीकेवीके सभागार में केंद्रीय रेशम बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस समारोह और रेशम उत्पादों एवं प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के रेशम उत्पादक किसान एवं बुनकर भी शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार देश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने और रेशम किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रेशम उत्पादन करीब 26 हजार मीट्रिक टन था, जो अब बढ़कर 42 हजार मीट्रिक टन हो गया है। सरकार ने वर्ष 2030-31 तक रेशम उत्पादन को 60 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही वर्ष 2028-29 तक भारत को विश्व स्तर पर रेशम उत्पादन में प्रथम स्थान पर लाने का संकल्प लिया गया है।
उन्होंने कहा कि शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाने और रेशम के कीड़ों के पालन के चक्रों में वृद्धि के माध्यम से किसानों की वार्षिक आय को 10 से 12 लाख रुपये तक बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने रेशम उत्पादक किसानों में प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ‘सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान’ पुरस्कार प्रतियोगिताएं आयोजित करने का भी आह्वान किया।
श्री सिंह ने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई तकनीक, संकर प्रजातियां और आधुनिक मशीनरी का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रेशम की मांग बढ़ रही है। रेशम उत्पादन से लेकर कताई और बुनाई तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके साथ ही देश के वस्त्र बाजार को 300 अरब डॉलर तक ले जाने तथा बुनकरों और श्रमिक वर्ग को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि कर्नाटक देश के कुल रेशम उत्पादन में अग्रणी राज्यों में शामिल है। सरकार इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। आधुनिक तकनीक और उच्च उत्पादन विधियों को अपनाकर वैश्विक निर्यात मानकों के अनुरूप रेशम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे घरेलू उत्पादन बढ़ने और आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव (रेशम) एवं केंद्रीय रेशम बोर्ड की उपाध्यक्ष सुश्री पद्मिनी सिंगला ने कहा कि वर्ष 2030-31 तक 60 हजार मीट्रिक टन रेशम उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसे हासिल करने के लिए उच्च उपज देने वाली रेशमकीट संकर प्रजातियों, आधुनिक मशीनों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भौगोलिक सूचना प्रणाली और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय रेशम बोर्ड और विभिन्न संगठनों के बीच समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। 28 वैज्ञानिकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए तथा उत्कृष्ट कर्मचारियों और हितधारकों को पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर बोर्ड के विभिन्न प्रकाशनों और पत्रिकाओं का विमोचन भी किया गया।
समारोह में सांसद एवं सीएसबी बोर्ड सदस्य जी. लक्ष्मीनारायण, बोर्ड के सदस्य सचिव पी. शिवकुमार, कर्नाटक सरकार के बागवानी एवं रेशम उत्पादन विभाग के सचिव गिरीश आर. सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
